रेखा गुप्ता: सत्ता का रहस्यमयी शतरंज और पर्दे के पीछे की चालें
0
टिप्पणियाँ
राजनीति संभावनाओं का खेल है। कौन कब कहां से आगे निकल जाए, यह तय करना आसान नहीं होता। लेकिन जब किसी के लिए मंच सजा हो, तो यह जानना दिलचस्प होता है कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा था। रेखा गुप्ता का दिल्ली की मुख्यमंत्री बनना केवल एक नियुक्ति भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय जनता पार्टी की गहरी सोच, सांगठनिक प्रतिबद्धता और रणनीतिक कौशल का एक सशक्त उदाहरण है। यह एक ऐसा घटनाक्रम है जो न केवल दिल्ली बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
गुप्त समीकरणों की जटिल बिसात
रेखा गुप्ता की नियुक्ति ने कई राजनीतिक समीकरणों को एक साथ साधने का काम किया। यह महज संयोग नहीं कि:
1. वैश्य बनाम वैश्य – अरविंद केजरीवाल के स्थान पर एक वैश्य समुदाय की ही नेता को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने इस वर्ग को यह संकेत दिया कि सत्ता में उनकी प्रासंगिकता बनी रहेगी।
2. महिला बनाम महिला – आतिशी मार्लेना की दावेदारी के बीच एक महिला मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने महिला नेतृत्व को और अधिक सशक्त किया।
3. एबीवीपी का धैर्य – यह संदेश भी स्पष्ट हुआ कि यदि कोई विद्यार्थी परिषद में संघर्ष करता है, तो धैर्य और समर्पण का फल एक दिन मुख्यमंत्री की कुर्सी के रूप में भी मिल सकता है।
4. संघटनात्मक निष्ठा का इनाम – रेखा गुप्ता ने अपने राजनीतिक जीवन में संगठन के लिए चुपचाप काम किया, जिसका प्रतिफल यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी बनकर सामने आया।
5. आरएसएस की छत्रछाया – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से नजदीकी ने यह सुनिश्चित किया कि संगठन का समर्पित कार्यकर्ता कभी अनदेखा नहीं होता।
दरी बिछाने से दरबार तक की रहस्यमयी यात्रा
रेखा गुप्ता की इस यात्रा में एक संदेश बहुत गहरा है— राजनीति में मेहनत, निष्ठा और समर्पण को अंततः मान्यता मिलती है। वर्षों तक संगठन में काम करने, निस्वार्थ भाव से सेवा करने और बिना किसी व्यक्तिगत महत्त्वाकांक्षा के संघर्ष करने वालों के लिए यह एक प्रेरणादायक उदाहरण है। यह सफर केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक दर्शन है। भाजपा की यह रणनीति उन लाखों कार्यकर्ताओं के मन में ऊर्जा भरने का काम करेगी जो संगठन के लिए दिन-रात परिश्रम कर रहे हैं।
दिल्ली से आगे की चाल: क्या संकेत मिलते हैं भविष्य के लिए?
यह बदलाव केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा। यह एक व्यापक संकेत है कि भाजपा अब नए नेतृत्व को तराशने और संगठन की निचली इकाइयों से कार्यकर्ताओं को शीर्ष पदों तक लाने में अधिक सक्रिय होगी। यह अन्य राज्यों में भी देखने को मिल सकता है। राजनीति का यह नया दौर उन लोगों के लिए खास संदेश लेकर आया है जो पर्दे के पीछे से काम कर रहे है
अगर आपने कभी मेहनत से दरी बिछाई है, तो दरबार भी आपके लिए सज सकता है!
Tags :
राजनीति
एक टिप्पणी भेजें