दिवाकर की दुनाली से
जलती बसें, मरता विश्वास और मौन व्यवस्था!
एक चार वर्षीय मासूम... जिसने शायद अभी ठीक से “माँ” कहना भी नहीं सीखा होगा… जिसकी उंगलियाँ अभी स्कूल की कॉपी…
एक चार वर्षीय मासूम... जिसने शायद अभी ठीक से “माँ” कहना भी नहीं सीखा होगा… जिसकी उंगलियाँ अभी स्कूल की कॉपी…
भारत आज एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ा है जहाँ उसे यह तय करना होगा कि उसकी शिक्षा व्यवस्था राष्ट्रनिर्माण का …
शिवपुरी की राजनीति का इतिहास बड़ा विचित्र रहा है। यहां कभी पानी के टैंकरों से शुरू हुई सहानुभूति की राजनीति स…
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर सिनेमा का परदा सत्ता के गलियारों तक पहुँचता दिखाई दे रहा है। दक्षिण भारत…
परिवर्तन प्रकृति का नियम है। समय के साथ युग बदलते हैं, मनुष्य की दिनचर्या बदलती है, भोजन बदलता है, विचार बद…
शिवपुरी में एक निजी अस्पताल में प्रसूता की मृत्यु के बाद सरकारी डॉक्टरों की निजी अस्पतालों में भूमिका, इलाज…